तुम्हारी हंसी

Wednesday, November 25, 2009




















दिन के कोलाहल में
जब खो जाता है मेरा वजूद,
धमनियों की धौंकनी
हो जाती है पस्त समंदर सी,
इच्छाओं का विराट आकाश
सिमट जाता है पुराने बटुए में
तब भी
सिक्कों की तरह कहीं बजती है
तुम्हारी हंसी.

कितना अच्छा होता कि
तुम्हारी हँसी
किसी बरगद सी होती
जिसमे हर साल नयी जड़ें फूटती,
उन पर टांग दिया करती
मैं अपनी मुस्कुराती आँखें,
पर ये तो
नर्म फाहों सी उड़ती है
मेरे आस पास,
उड़ती है एक अनुभवी बाज़ सी...

मगर फिर भी
जब तुम, सिर्फ अपने लिए रोते हो
तब भी जाने क्यों
भुला देती हूँ तुम्हारी हंसी.


Painting Photo : Blue Methilen
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उदास पत्तियां

Wednesday, November 11, 2009
























अँधेरे में तारों जितनी ही
बची है उम्मीदें
मेरे गुलाब के लिए.

उसकी मुरझाती उदास पत्तियां
पीले पड़ते ख़तों के माफिक हो गयी हैं,
अब कलियों के फूटने की आस भी
रखूं किस भरोसे ?
मौसम ने भी छोड़ दिया है
मुहब्बतों पर अहसान करना.

सुबह की कोहरे भरी धूप में
जाने क्यों खिली खिली दीखती है
मेरे गुलाब की सूखती हुई पत्तियां
जबकि तुमने, ऐसा तो कभी न कहा था
आओगे लौट के एक दिन।

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सफ़र के लिए

Friday, November 6, 2009

सफ़र में
तमाम जरूरी चीजों के साथ
अपनी पहचान भी ले जाना इस बार.
ये तय नहीं है कि
फाह्यान और ह्वेनसांग की तरह
तुम्हारी यात्राओं के बारे में
बच्चे पढ़ें, शोर करते हुए
फिर भी
जब रुको किसी मंदिर के आँगन में
देखना कि मूर्ति के चरण
उसके मुख से सुन्दर है
मुख ने पाई है आंसुओं से भीगी प्रार्थनाएं
चरणों ने पाया है आत्मीय स्पर्श का सुख
कि ये चरण
सफ़र का एक जरूरी सामान है.

सफ़र के लिए
तुम खुद बना सकते हो रास्ता
पहाड़ों के ऊपर या नदी के पार
मगर बैठना पेड़ की छाँव में
बीनना सूखी टहनियां
विस्मृत पत्तों को देखना जी भर के
सुना है मैंने कि
वे रात के टूटे हुए ख्वाब होते हैं.
निस्तब्धता को तोड़ते हुए
शाख पर बैठे परिंदों को देना
दीर्घायु होने की शुभकामनाएं
कि वे गाते रहें लोकगीत
अपनी अनचीन्ही आवाज़ में
और पेड़ हरा भरा रहे सदा के लिए
पेड़ भी सहारा है सफर का.

सफ़र के लिए
एक और जरूरी चीज होती है,
लो मैं तुम्हें अपना मन भी देती हूँ.


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