Friday, November 6, 2009
सफ़र में
तमाम जरूरी चीजों के साथ
अपनी पहचान भी ले जाना इस बार.
ये तय नहीं है कि
फाह्यान और ह्वेनसांग की तरह
तुम्हारी यात्राओं के बारे में
बच्चे पढ़ें, शोर करते हुए
फिर भी
जब रुको किसी मंदिर के आँगन में
देखना कि मूर्ति के चरण
उसके मुख से सुन्दर है
मुख ने पाई है आंसुओं से भीगी प्रार्थनाएं
चरणों ने पाया है आत्मीय स्पर्श का सुख
कि ये चरण
सफ़र का एक जरूरी सामान है.
सफ़र के लिए
तुम खुद बना सकते हो रास्ता
पहाड़ों के ऊपर या नदी के पार
मगर बैठना पेड़ की छाँव में
बीनना सूखी टहनियां
विस्मृत पत्तों को देखना जी भर के
सुना है मैंने कि
वे रात के टूटे हुए ख्वाब होते हैं.
निस्तब्धता को तोड़ते हुए
शाख पर बैठे परिंदों को देना
दीर्घायु होने की शुभकामनाएं
कि वे गाते रहें लोकगीत
अपनी अनचीन्ही आवाज़ में
और पेड़ हरा भरा रहे सदा के लिए
पेड़ भी सहारा है सफर का.
सफ़र के लिए
एक और जरूरी चीज होती है,
लो मैं तुम्हें अपना मन भी देती हूँ.
[ ]


